Waiting for the dawn

First fog then dusk and now dark…

No signs of light even no spark,

Hope of getting out of this gloom..

Belief that sun will shine and flowers will bloom,

It’s not easy to come out of this shadiness…

Need a lot of efforts and faith to find that brightness,

But I firmly believe that there is dawn after this murk….

मेरे प्यारे पापा

मेरे प्यारे पापा, मेरे भोले पापा…

यादों की रेलगाड़ी में बैठ चल पड़ी हूं बचपन से लेकर अभी तक की यादों में..

वो आपका बारी बारी से सभी को झूला झुलाना बाहों में,

तो कभी बन जाना घोड़ा और करवाना पीठ की सवारी.. बस इसका बहुत हुआ पापा अब है बारी हमारी,

अपनी इस छोटी सी गुड़िया की एक ज़िद पर पूरे बाज़ार से ढूंढ कर लाना फ्रॉक गुड़िया वाली..

कभी बार बार ज़िद करने पर लाना अपनी गुड़िया के लिए गुड़िया आँखों वाली,

जब हुई ज़रा सी भी तबियत मेरी नासाज़.. बैठे रहे फिक्र से पूरी रात सिर पर रखकर हाथ,

जब कभी भी कुछ मांगने पर माँ ने किया मना.. आपने बिना बोले ला कर दिया उस से कई गुना,

नहीं किया भेद कभी बेटे और बेटी में.. किसी ने कुछ कहा तो हमेशा कहा करो सुधार अपनी सोच छोटी में,

पापा जो हमेशा ही आगे बढ़ने और पैरों पर खड़ा होने करते रहे प्रेरित.. जिनसे रहता था हमेशा अपनेपन का एहसास और संबल पोषित

आज निकल पड़े हैं दूर बहुत दूर सुदूर यात्रा पर छोड़ कर अनगिनत यादें..

मेरे प्यारे पापा, मेरे भोले पापा

खूबसूरत दो आँखें

Wanna sink into these eyes

जितने आसमानी ख्वाब हैं इनमें सिमटे हुए,

उतनी ही हक़ीक़त को मापती गहराईयां भी…

कभी तो कह देती हैं वो सब जो कहना चाहती हैं,

और कभी छुपा लेती हैं जाने कितने ही राज़ गहरे…

कभी हिरण सी चंचलता,

कभी झील सा ठहराव…

खींचे कभी कशिश से अपनी ओर,

कभी दिखाती हैं हों जैसे कोई और…

देख के इनको अब और क्या देखें,

तुम्हारी ये दो खूबसूरत आँखें…

सोचते हो क्यूँ

क्या होगा अगर मैंने ये किया,

क्या होगा अगर मैंने वो नहीं किया..

क्या होगा अगर मैं एक दिन करूँ वही जो दिल करे,

क्या होगा अगर वो नहीं किया जो बांकी सब कहें,

क्या होगा अगर आज कर लूं मन की,

हँस लूं दिल खोल के, फिक्र छोड़ दूं जग की..

क्या होगा अगर…..

सोचते हो क्यूँ??

ज़िन्दगी है जी लो जी भर के एक एक लम्हा,

सोचते हो क्यूँ?

जीवन चलने का नाम…

हो उतार या चढ़ाव,

बीहड़ों सा उबड़ खाबड़ या हो झील सा ठहराव..

अनुभवों से भरी हुई वृद्धावस्था

बचपन हो या युवावस्था,

कितनी भी हों मुसीबत

ढेर सारी खुशियाँ और नैमतें,

चलने का नाम ही जीवन है,

ये जीवन चलता रहता है

निरंतर चलता रहता है…..

वो एक दिन

कटते कटते और गिनते गिनते

सोचते सोचते और कहते कहते,

पहले थोड़ा ये कर लूं और उसके बाद थोड़ा वो भी,

इसकी फिक्र करूं और उसकी भी

कुछ ये समेटू कुछ वो भी,

बिखरे बिखरे से ये लम्हे और कुछ अनसुलझी पहेलीयां

इन सब के बीच हमेशा रहती गिन,

जीऊँगी जी भर के वो एक दिन……

Belief

What lies inside our heart is…

strengthens our mind and soul,

Amidst the toughest time…

where nothing seems to be yours or mine,

Is this the end of everything …

no it’s not,

We can and we will achieve …

There is a new beginning

I really believe 😊

#Belief