खूबसूरत दो आँखें

Wanna sink into these eyes

जितने आसमानी ख्वाब हैं इनमें सिमटे हुए,

उतनी ही हक़ीक़त को मापती गहराईयां भी…

कभी तो कह देती हैं वो सब जो कहना चाहती हैं,

और कभी छुपा लेती हैं जाने कितने ही राज़ गहरे…

कभी हिरण सी चंचलता,

कभी झील सा ठहराव…

खींचे कभी कशिश से अपनी ओर,

कभी दिखाती हैं हों जैसे कोई और…

देख के इनको अब और क्या देखें,

तुम्हारी ये दो खूबसूरत आँखें…

सोचते हो क्यूँ

क्या होगा अगर मैंने ये किया,

क्या होगा अगर मैंने वो नहीं किया..

क्या होगा अगर मैं एक दिन करूँ वही जो दिल करे,

क्या होगा अगर वो नहीं किया जो बांकी सब कहें,

क्या होगा अगर आज कर लूं मन की,

हँस लूं दिल खोल के, फिक्र छोड़ दूं जग की..

क्या होगा अगर…..

सोचते हो क्यूँ??

ज़िन्दगी है जी लो जी भर के एक एक लम्हा,

सोचते हो क्यूँ?